The new constitution, the Prime Minister has called the Nepali PM edification

नई दिल्ली,नए संविधान पर जारी तकरार और आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नेपाली समकक्ष केपी शर्मा ओली को विवाद का सहमति से स्थायी समाधान निकालने की नसीहत दी है।

बृहस्पतिवार को नेपाल के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी को फोन कर राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ संविधान में संशोधन की तैयारियों की जानकारी दी।

नए संविधान पर भारत की आपत्तियों के मद्देनजर अरसे से जारी कूटनीतिक खींचतान के बीच नेपाल सरकार ने कुछ संशोधनों को हरी झंडी दिखाने का फैसला किया था।

भारत ने तब नेपाल के इस कदम का स्वागत किया था, मगर आंदोलनरत मधेसी अब भी सरकार के संशोधन की घोषणा को राजनीतिक छलावा करार दे रहे हैं।

गौरतलब है कि भारत ने मधेसियों के तीखे विरोध के बीच नेपाल को संविधान में नागरिकता, परिसीमन सहित कुछ अन्य प्रावधानों का संशोधन करने का सुझाव दिया था। बीते दिनों नेपाल सरकार ने भारत के कुछ महत्वपूर्ण सुझावों को स्वीकार करने की घोषणा की थी।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाली पीएम ने पीएम मोदी से फोन पर बातचीत कर नेपाल के ताजा राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा की। दोनों के बीच करीब 19 मिनट तक हुई इस चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने अपने नेपाली समकक्ष को संविधान पर उपजे विवाद का सहमति के जरिए स्थायी निदान निकालने की नसीहत दी।

पीएम मोदी ने इस दौरान ओली को नए साल की शुभकामना भी दी। मोदी ने मधेस आंदोलन को एक राजनीतिक मसला बताते हुए समस्या का दीर्घकालीन समाधान खोजने का सुझाव दिया था।

नेपाली पीएम के प्रेस सलाहकार प्रमोद दहल ने बताया कि ओली ने मधेस के मुद्दे पर भी मोदी से बात की। बातचीत में उन्होंने संसद में प्रस्तुत किए गए अपने संविधान संशोधन के प्रस्ताव के बारे में भी बताया। दहल ने बताया कि प्रस्ताव को लेकर मोदी ने सकारात्मक रुख अख्तियार किया है।

नेपाली प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने के लिए खुद प्रयास करने की बात कही है। ओली ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने सीमा के नाकों पर आपूर्ति व्यवस्था सहज करने को लेकर आग्रह किया। इस पर मोदी ने साफ किया कि इसमें भारत की कोई भूमिका नहीं है और यह मधेसी आंदोलन की वजह से है।

गौरतलब है कि नए संविधान पर भारत और नेपाल का कूटनीतिक तकरार चरम पर पहुंच चुका है। नेपाल ने भारत पर आर्थिक नाकेबंदी के आरोप लगाते हुए पिछले दिनों पहली बार संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाया था।

इसके बाद जरूरी चीजों की किल्लत से निजात पाने के लिए नेपाल ने चीन के साथ कई समझौते किए थे। हालांकि इसके बाद अचानक नेपाल ने अपने रुख में बड़ा बदलाव लाते हुए संविधान में संशोधन की घोषणा की थी।

साभार http://www.amarujala.com/

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