केंद्र की मोदी सरकार गरीबों के हितों का कितना ध्यान रखती हैं इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं कि मनरेगा के तहत मिलने वाली न्यूनतम मजदूरी के दामों जो बढ़ोतरी की गई हैं वह महज सिर्फ एक रूपये की हैं. यह बढ़ोतरी बीते 11 सालों में न्यूनतम मजदूरी में की गई अब तक की सबसे कम बढ़ोतरी है.

तय की गई न्यूनतम मजदूरी दर 1 अप्रेल 2017 से लागू हो जाएंगी. यह बढ़ोतरी कई राज्यों के लिए की गई है. असम, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में मजदूरी की दर 1 रुपये से बढ़ाई है.वहीँ ओड़िसा में 2 रुपये और पश्चिम बंगाल में 4 रुपये से बढ़ोतरी की गई है. इसके अलावा केरल और हरियाणा में मजदूरी 18 रुपये से बढ़ाई गई है. इस बढ़ोतरी के बावजूद भी लगभग 11 राज्यों में न्यूनतम मजदूरी की दर के मुकाबले, तय की गई मजदूरी काफी कम हैं.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इस बढ़ोतरी को लेकर कहा कि इस साल न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी 2.7 फीसद के हिसाब से की गई है. बढ़ोतरी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि रोजगार योजना और न्यूनतम दरों के बीच बनी खाई को 2014 में अर्थशास्त्री महेंद्र देव की कमेटी द्वारा दिए गए सुझावों से संकुचित किया जा सकता था.

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उन्होंने आगे कहा, “सुप्रीम कोर्ट का आदेश हैं कि अगर किसी राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर से कम मजदूरी मिलती है तो उसे बंधुआ मजदूरी माना जाएगा।”

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