इस्लामिक मामलों में चैनल का मुद्दा होता हैं तय, उलेमा डिबेट में हिस्सा लेने से बचे: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

7:39 pm Published by:-Hindi News

उलेमाओं से तीन तलाक सहित अन्य इस्लामिक मामलों में हिस्सा ने लेने की दारल उलूम देवबंद की अपील का आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी समर्थन किया हैं.

बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना यासीन उस्मानी ने कहा कि हम इससे सहमत हैं, क्योंकि आम तौर पर चैनलों का अपना तय एजेंडा होता है और उसी के अनुसार वे कार्यक्रम का संचालन करते हैं. ऐसे में बेहतर यही है कि उलमा इसमें शरीक ना हों.

उस्मानी ने बताया कि बोर्ड शरिया कानूनों के बारे में लगातार उलझते भ्रम को दूर करने के लिये सोशल मीडिया पर तलाक, शादी, हलाला, वारिसाना हक, महिला अधिकार समेत तमाम मसलों से सम्बन्धित मुस्लिम पर्सनल लॉ के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराएगा.

उन्होंने बताया कि बीते 15-16 अप्रैल को लखनऊ में हुई बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे को सामने रखते हुए एक सोशल मीडिया समिति बनाने का फैसला किया गया है. इसके गठन के लिये बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी और महासचिव मौलाना वली रहमानी को अधिकृत किया गया है. उस्मानी ने बताया कि इस समिति के बहुत जल्द गठित हो जाने की उम्मीद है.

बोर्ड के सदस्य ने कहा कि उन्होंने बैठक के दौरान यह विचार रखा था कि बोर्ड अपना कोई टीवी चैनल और अखबार भी शुरू करे. इस पर बोर्ड के तमाम पदाधिकारी आम तौर पर सहमत तो दिखे, लेकिन इसके लिये जरूरी संसाधनों की फिलहाल कोई उपलब्धता नहीं देखते हुए इस बारे में कोई फैसला नहीं हो सका. उस्मानी ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इस दिशा में कुछ ठोस काम करना ही पड़ेगा.

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