सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर लाइफ सपोर्ट पर हैं, उनकी मौत की खबर गलत हैं. मीडिया में सुबह से चल रही पूर्व मुख्य न्यायाधीश की मौत की खबर पूरी तरह से गलत हैं.

29 सितंबर 2012 को अल्तमस कबीर ने चीफ जस्टिस पद की शपथ ली थी और कबीर सुप्रीम कोर्ट के 39वें मुख्य न्यायाधीश बने थे. उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की थी. उनके पिता जहांगीर कबीर पश्चिम बंगाल कांग्रेस के जाने माने नेता थे. कबीर 6 अगस्त 1990 को कोलकाता हाईकोर्ट के जज बने थे. 11 जनवरी 2005 को वह कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने.

गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने जानबूझ कर सुप्रीम कोर्ट में उनके प्रमोशन को रोका. जस्टिस भास्कर भट्टाचार्य के आरोप ने कबीर को विवादों के घेरे में ला दिया. रिटायरमेंट से तुरंत पहले उन पर नीट मामले का विवाद भी जुड़ा. इस मामले में फैसले से पहले ही इसकी जानकारी लीक हो गई थी.

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अल्तमस कबीर उस बेंच में शामिल थे जिसने दो इटैलियन मरीन्स पर केरल के दो मछुआरों पर गोली चलाने का आरोप था, इसमें दोनों ही मछुआरों की मौत हो गई थी.

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