सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने उड़ीसा उच्च न्यायालय की सर्किट पीठ के शताब्दी समारोह के उद्घाटन के कार्यक्रम में एक बार फिर न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा उठाते हुवे कहा कि सरकार लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित नही कर् सकती. न्याय पाना उनका अधिकार हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय विधि आयोग ने 1987 में तब के लंबित मामलों को देखते हुए 44 हजार न्यायाधीशों का सुझाव दिया था। देश में मौजूदा समय में मात्र 18 हजार न्यायाधीश हैं।

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30 साल बीत गए हैं। हम लोग कम संख्या होने के बावजूद काम जारी रखे हुए हैं। यदि आप भारत की जनसँख्या अनुसार देखेंगे तो हमें लंबित मामलों को निपटाने के लिए 70 हजार न्यायाधीश की जरुरत हैं।

 

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