नोटबंदी की अवधि के दौरान बैंक कर्मचारियों पर लगाये गये प्रतिबंधों के विरोध और भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को संरक्षित रखने की मांग को लेकर अब 7 फरवरी को बैंक कर्मचारी राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे. बैंकों की ट्रेड यूनियनों की और से केंद्र को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी गई हैं.

ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा,  ‘ऐसी उम्मीद थी कि सरकार और रिजर्व बैंक बैंकों और जनता के समक्ष आ रही दिक्कतों को हल करने के लिए कदम उठाएंगे, लेकिन अभी भी नकदी संकट की स्थिति बनी हुई है. बैंकों में नकदी की कमी है. इस वजह से बैंक 24,000-1,00,000 रुपये के अंकुश वाली निकासी सीमा को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं.

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इस हड़ताल में एआईबीईए के अलावा ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) तथा बैंक इम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया भी शामिल होंगी. यूनियनों की यह भी मांग है कि एक करोड़ रुपये या ज्यादा के कर्ज ना चुकाने वालों के के नाम प्रकाशित किए जाएं और डूबे कर्ज की वसूली के लिए कड़े कदम उठाए जाएं.

गौरतलब रहें कि आरबीआई के कर्मचारी पहले ही चिट्ठी लिखकर नोटबंदी को लेकर अपना विरोध जता चुके हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारियों ने गवर्नर उर्जित पटेल को चिट्ठी लिखकर कहा था कि रिजर्व बैंक की दक्षता और स्वतंत्रता वाली छवि उसके कर्मचारियों के दशकों की मेहनत से बनी थी, लेकिन इसे एक झटके में ही खत्म कर दिया गया। यह अत्यंत क्षोभ का विषय हैं.’

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