रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है जिसमें उसी जगह पर मंदिर बनाने के लिए जमीन देने की बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ संत रविदास मंदिर की 400 वर्गगज जमीन सरकार की ओर से बनाई जानेवाली समिति को सौंपने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि साइट के 200 वर्ग मीटर क्षेत्र को मंदिर निर्माण के लिए भक्तों की एक समिति को सौंपा जा सकता है। कोर्ट ने केंद्र के प्रस्ताव को रिकॉर्ड में ले लिया और सोमवार को आदेश पारित करने के लिए मामले को सूचीबद्ध किया।

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि उन्होंने भक्तों और सरकारी अधिकारियों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ परामर्श किया और केंद्र सरकार ने साइट के लिए भक्तों की संवेदनशीलता और विश्वास को देखते हुए भूमि देने के लिए सहमति व्यक्त की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर के लिए पक्का निर्माण किया जा सकता है। इसे लेकर केंद्र सरकार एक समिति का गठन करेगी जो मंदिर का निर्माण कराएगी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उस जगह पर किसी के भी द्वारा व्यावसायिक पार्किंग या गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।

संत रविदास के मंदिर का पक्का निर्माण करने को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि क्योंकि यह मंदर जंगल के इलाके में है इसलिए यहां पक्का निर्माण करना सही नही होगा। लोगों की आस्था को देखते हुए सरकार जमीन दे रही है लेकिन यहां लकड़ी का ही मंदिर बनाया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार जमीन दे रही है तो मंदिर के लिए पक्के निर्माण पर रोक कैसे लगाई जा सकती है।

बता दें कि 10 अगस्त को संत गुरु रविदास मंदिर को तोड़े जाने के बाद उनके अनुयायियों ने कोहराम मचा दिया था। लाठी-डंडों से लैस अनुयायी मंदिर तोड़ने का विरोध कर रहे थे। उस समय पुलिस ने 96 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर भी शामिल थे। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद केंद्र सरकार की भी खूब आलोचना हुई थी।

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