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चित्तोडगढ | नोट बंदी के बाद देश के बैंकों मे कैश नही है, एटीएम खाली पड़े हुए है और लोग त्राहि त्राहि कर रहे है. ऐसे में जब लोगो के पास नए नोटों का अकाल पड़ा हुआ है तब मंदिरों को मिलने वाले चंदे में क्या कोई कमी आई है? कुछ मंदिरों में नोट बंदी का असर देखा जा सकता है. यहाँ आने वाला चन्दा अब पहले की तुलने में 40 फीसदी तक घटा है लेकिन कुछ मंदिर अभी भी मालामाल हो रहे है.

राजस्थान के एक प्रसिद्ध मंदिर को नोट बंदी के बाद भी लगातार चंदा मिल रहा है. चौकाने वाली बात यह है की इस मंदिर को ज्यादातर चंदा नये नोटों में मिला है. चित्तोडगढ के प्रसिद्ध सांवलिया जी मंदिर को नोट बंदी के बाद करीब 9 लाख रूपए चंदे के तौर पर मिले है. हालाँकि पिछले दो महीने में मंदिर को करीब साढ़े चार करोड़ रूपए चंदे के रूप में मिले है.

अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार मंदिर में काम करने वाले एक कर्मचारी भगवान् लाल चतुर्वेदी ने बताया की दो महीने बाद 28 नवम्बर को मंदिर की दान पेटी खोली गयी. इसमें से करीब साढ़े चार करोड़ रूपए चंदे के तौर पर मंदिर को मिले है. लेकिन हम यह देखकर चौंक गए की श्रदालुओ ने नए नोट भी दान पेटी में डाले हुए है.

भगवान् लाल ने बताया की दान पेटी से 2000 के 441 नोट निकले है जिनकी कीमत करीब 8.8 लाख रूपए है वही नए 500 के नोट भी दान पेटी से निकले है. इनकी संख्या करीब 67 है जिनका मूल्य 33 हजार 500 रूपए है. भगवान लाल ने यह भी बताया की मंदिर को चेक से भी दान मिला है. नोट बंदी के बाद पैसो की किल्लत को देखते हुए कुछ लोगो ने चेक से ही दान देना मुनासिब समझा.


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