सुप्रीम कोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव की प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में निर्वाचन आयोग के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जिसमें वाराणसी लोकसभा सीट से उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने 18 नवम्बर को तेज बहादुर की अपील पर सुनवाई पूरी की। जिसके बाद पीठ ने आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। उच्च न्यायालय ने तेज बहादुर का नामांकन पत्र रद्द करने के निर्वाचन अधिकारी के फैसले के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तेज बहादुर की याचिका खारिज करते हुए था कि वो न तो वाराणसी के वोटर हैं और न ही पीएम मोदी के खिलाफ उम्मीदवार थे। इसलिए उनकी तरफ से याचिका दाखिल करने का कोई औचित्य नहीं है। हाई कोर्ट के इस फैसले को तेज बहादुर ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन उन्हें यहां से भी राहत नहीं मिली है।

बता दें कि तेज बहादुर ने सैन्य बलों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करते हुए एक वीडियो ऑनलाइन वीडियो पोस्ट किया था, जिसके बाद उन्हें 2017 में बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होने  वीडियो में आरोप लगाया था कि सशस्त्र बल के जवानों को घटिया किस्म का भोजन दिया जाता है।

जिसके बाद वो पीएम मोदी के खिलाफ 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने वाराणसी पहुंचे थे। सपा ने उन्हें टिकट भी दे दिया था, लेकिन जानकारी पूरी न देने के चलते उनका नामांकन कर दिया गया।

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