tajm

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को ताज सरंक्षण के लिए विजन डाक्यूमेंट दाखिल करने में राहत प्रदान करते हुए 15 नवंबर तक का और समय दिया है। विजन डॉक्यूमेंट को लेकर यूपी सरकार ने कहा कि वो इस संबंध में एक्सपर्ट से राय ले रही है, लिहाजा वो फाइनल विजन डॉक्यूमेंट 15 अक्तूबर तक नहीं दे पाएगी।

इसके अलावा यूपी सरकार ने कोर्ट को बताया कि उसके लिए ये मुश्किल है कि पूरे आगरा को हेरिटेज सिटी घोषित किया जा सके। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि ताज महल के इर्द गिर्द के कुछ इलाकों को विरासत घोषित करने के बारे में वह विचार करे। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने विजन डाक्यूमेंट तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल परियोजना समन्वयक से कहा, ‘‘यदि ताजमहल खत्म हो गया तो आपको दुबारा अवसर नहीं मिलेगा।’’

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर कई सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा, अगर सरकार के पास ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) में इंडस्ट्रीज की संख्या सही नहीं थी। तो इसका मतलब है कि उसका विजन डाक्यूमेंट ड्राफ्ट ही गलत है।कोर्ट ने कहा कि अभी तक सरकार को ये ही नहीं पता है कि इस क्षेत्र में इंडस्ट्री कितनी चल रही हैं।

इससे पहले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया था कि पर्यावरण मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी केंद्र सरकार की तरफ से और ताज ट्रेपेजियम ज़ोन के अध्यक्ष यानी आगरा मंडल के कमिश्नर यूपी सरकार की तरफ से ताज संरक्षण के जवाबदेह अधिकारी होंगे।

कोर्ट ने सुझाव को मंज़ूर करते हुए कहा था कि अब आगे से ये दोनों अधिकारी ही हलफनामा दाखिल करेंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एमसी मेहता ने ताज ट्रेपेजियम ज़ोन के पुर्नगठन की मांग उठाई थी और कहा था कि भुरेलाल कमेटी के जैसा ही एक कमेटी का गठन होना चाहिए जो ताज के देखभाल का काम देखे। जिस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को तीन हफ़्ते में लिखित में सुझाव देने को कहा था।

Loading...