मुंबई: इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्ल) और उनके सहाबा (साथियों), अहले बैत (वंशजों) को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली अपमानजनक पोस्ट और टिप्पणियों से निपटने के लिए रज़ा एकेडमी द्वारा गठित किए गए तहफ्फुज ए नामुस ए रिसालत बोर्ड की एक अहम बैठक शनिवार को जालना औरंगाबाद में दरगाह हजरत सय्यद अहमद शेरसवार पर हुई। जिसमे बड़ी संख्या में स्थानीय वकीलों ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए दरगाह के सज्जादनशीन मौलाना सय्यद जमील ने कहा कि तहफ़्फुज़ ए नामुस रिसालत के लिए हम हर समय तैयार है। हर मुसलमान गुस्ताख़ ए रसूल के खिलाफ बेखौफ होकर एफ़आईआर दर्ज कराये। ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमों की पैरवी की जाएगी और उन्हे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।

रजा एकेडमी प्रमुख अल्हाज सईद नुरी ने उपस्थित वकीलों का धन्यवाद किया और कहा कि तहफ्फुज ए नामुस ए रिसालत बोर्ड के लिए आपकी सेवाएँ बड़ी मददगार साबित होंगी। उन्होने देश के अन्य हिस्सों के वकीलों से भी तहफ़्फुज़ ए नामुस रिसालत के लिए आगे आने की अपील की। 

मुंबई से आए मौलाना जफरुद्दीन रजवी ने कहा कि मुसलमान अपने बच्चों डॉक्टर, इंजीनियर के साथ किसी एक को वकील जरूर बनाए। उन्होने कहा कि हम भूखे-प्यासे रह सकते है। सभी परेशानियों का सामना कर सकते है। लेकिन शाने रिसालत में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं कर सकते। जब हमारा बच्चा वकील होगा तो गुस्ताख़ ए रसूल पर कानूनी कार्रवाई कर जेल जरूर पहुंचाएगा।

इस दौरान एडवोकेट साहिल सिद्दीकी ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सिर्फ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं में नहीं बल्कि रासुका (NSA), मकोका, और आईटी एक्ट के तहत एफ़आईआर दर्ज कराई जाए। वहीं एडवोकेट शाहिद अहमद ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ फास्टट्रैक अदालतों में मुकदमों की सुनवाई हो। साथ ही ऐसी कड़ी सज़ा मिले की किसी भी धर्म के महापुरुषों का ये अपमान न कर सके।

रिटायर्ड जज रहमत अली ने वकीलों से कहा कि वह ऐसे मामलों को एक ही ड्राफ्ट से दर्ज कराया जाए और केस टेबल पर आते ही तमाम वकील पैरवी के लिए हाजिर रहे। अदालत में मजबूती के साथ जिरह करे। और गुस्ताखों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवाए। उन्होने आम मुस्लिमों को भी इस मुहिम से जोड़ने की भी बात कही।

तहरीक-ए-दुरूद-ओ-सलाम के प्रचारक मौलाना मुहम्मद अब्बास रिजवी ने वकीलों के समर्थन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इसी तरह, सम्मान और गरिमा का संरक्षण किया जाना चाहिए। बोर्ड को ऐसे ही समर्थन मिलना जारी रहा तो इंशाअल्लाह ऐसे मामलों पर बहुत जल्द पार पाया जा सकता है।

इस मौके पर मौलाना दिलावर हुसैन रिजवी, मुफ्ती गुलाम नबी अमजदी, मौलाना अल्लाह बख्श, मौलाना ग़ुलाम जिलानी मिस्बाही, हाफ़िज़ वसीम रज़ा, हाफ़िज़ सैयद उमर, हाफ़िज़ अमजद रज़ा, मौलाना मुहम्मद अमान-उल-रब कादरी आदि मौजूद रहे।