निज़ामुद्दीन मरकज के मामले के सामने आने के बाद तबलीगी जमात के खिलाफ सोशल मीडिया से लेकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया में प्रोपेगेंडा जारी है। हालांकि अब सच्चाई सामने आना शुरू हो गई।

हाल ही में बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने तब्लीगी जमात पर लगाए गए आरोपों को जांच के बाद झूठा करार दे दिया। सहारनपुर पुलिस ने कहा है कि तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। सहारनपुर पुलिस ने एक प्रसिद्ध हिंदी समाचार चैनल के एक समाचार फ्लैश पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसने जमाती और मुस्लिम समुदाय को अपमानित करने के लिए उकसाने वाली सुर्खियों को लगाया।

इऱफान नवाशेरवाला ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶನಿವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 4, 2020

सहारनपुर पुलिस ने कहा, “हम यह बताना चाहते हैं कि हमने रामपुर मनिहारान के थाना प्रभारी को विभिन्न समाचार पत्रों, समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म द्वारा किए गए दावों को सत्यापित करने के लिए निर्देशित किया था कि जमात के लोगो ने क्वारंटाइन में हंगामा किया और सार्वजनिक रूप से शौच किया गैर-शाकाहारी भोजन मांगा। जांच के बाद, यह पाया गया कि विभिन्न समाचार पत्रों, समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों द्वारा किए गए दावे नकली थे। इसलिए, सहारनपुर पुलिस उपरोक्त प्रकाशित समाचार को पूरी तरह से खारिज करती है। ”

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इसी बीच सोशल मीडिया पर क्वारंटाइन किए गए लोगों के कुछ विडियो भी सामने आए है। जो लोगों की आँख खोलने के लिए काफी है। इन विडियो में देखा जा सकता है जिन अस्पतालों में उन्हे आइसोलेट किया गया है। वह गंदे है और जमात के लोग उनकी खुद साफ-सफाई कर रहे है। वह भी ऐसे हालत में जब उन पर डॉक्टर पर थूकने और नर्सों को छेड़ने के झूठे आरोप लग रहे है।

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