कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने हुरियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा दे दिया है। जारी ऑडियो संदेश में उन्होंने इसका ऐलान किया।

सैयद अली शाह गिलानी ने गिलानी ने एक ऑडियो मैसेज में कहा कि, हुर्रियत कांफ्रेंस के मौजूदा हालात को देखते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया है। हुरियत कान्फ्रेंस के मौजूदा हालात को देखते हुए मैंने अलग होने का फैसला किया है। फैसले के बारे में हुर्रियत के सारे लोगों को चिट्ठी लिखकर कर जानकारी दे दी गई है।

गिलानी 1993 से हुर्रियत कांफ्रेंस से जुड़े थे और 2003 में उन्हें कांफ्रेंस के लाइफ-टाइम चेयरमैन के रूप में घोषित किया गया था। सैयद अली शाह गिलानी ने कहा, “वर्तमान स्थिति को देखते हुए, मैं ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देता हूं। मैंने हुर्रियत के सभी घटकों को फैसले के बारे में सूचित कर दिया है।”

बता दें कि, 90 साल के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की सेहत भी पिछले दिनों से ठीक नहीं है। वह इसी साल फरवरी में अस्पताल में भर्ती हुए थे और कई बार उनकी सेहत को लेकर अफवाहें भी उड़ीं थी, हालांकि वे बाद में ठीक हो गए थे और वैसे भी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी हमेशा विवादों में रहे हैं।

6 साल पहले यानी 2014 में उन्होंने कहा था कि, कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। गिलानी और कुछ दूसरे हुर्रियत नेताओं के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लश्कर-ए-तैयबा से कथित तौर पर फंड लेने पर मामले में जांच भी की थी। गिलानी पर आरोप था कि, उन्‍होंने जम्मू एवं कश्मीर में विध्‍वसंक गतिविधियों के लिए ये पैसे लिए।

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