हरिद्वार | देश के सबसे बड़े रियलिटी शो बिग बॉस के दसवे सीजन में बतौर कंटेस्टेंट भाग लेने वाले स्वामी ओम की मुसीबते कम होने का नाम नही ले रही है. पहले उनको बिग बॉस से बाहर किया गया और अब संत समाज ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संत समाज नही चाहता की स्वामी ओम को संत के नाम से पुकारा जाए.

अखिल भारतीय संत परिषद् और जुना अखाड़े का कहना है की स्वामी ओम जैसे लोग संत नही हो सकते. वो एक बहरूपिया है और उसको इसी नाम से पुकारा जाना चाहिए. जुना अखाड़े ने स्वामी ओम को संत के नाम पर कलंक करार दिया. इसके अलावा आगामी संत परिषद् की बैठक में उनसे संत की पदवी लेने का फैसला भी किया गया.

अखिल भारतीय जुना अखाड़ा परिषद् के सचिव श्रीपंचदशनाम और अंतर्राष्ट्रीय सचिव महंत नारायण गिरि ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की स्वामी ओम जैसे लोग संत के नाम पर कलंक है. उन्हें संत कहलाने का कोई हक़ नही है. सिर्फ संत जैसे कपडे पहनने से कोई संत नही हो जाता. इसलिए 13 जनवरी को होने वाली बैठक में स्वामी ओम से संत की पदवी ले ली जाएगी.

उधर अखिल भारतीय संत परिषद् के राष्ट्रिय संयोजक यति नरसिंहानंद सरस्वती का कहना है की एक साजिश के तहत स्वमी ओम को बिग बॉस में ले जाया गया. कुछ लोग उनके द्वारा संत समाज और हिन्दू धर्म का मजाक उडाना चाहते थे. हालांकि यति सरस्वती ने भी स्वामी ओम से संत की पदवी छिनने की पैरवी की. उनका कहना था की वो दिल्ली के मंदिरों में कभी संत तो कभी सूट बूट में नजर आता है. लेकिन वो लोग उसको संत नही मानते थे.

गौरतलब है की स्वामी ओम को बिग बॉस ने दो अन्य उम्मीदवार बानी जे और रोहन के ऊपर पेशाब फेंकने के आरोप में घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इसके बाद स्वामी ओम ने शो के होस्ट सलमान खान के ऊपर कई संगीन आरोप लगाये. ओम का कहना था की सलमान हिन्दू विरोधी और ISI के एजेंट है. इसके अलावा स्वामी ने बिग बॉस को धमकी देते हुए कहा की अगर उसे दो हफ्ते में बिग बॉस में वापिस नही बुलाया गया तो वो शो का फिनाले नही होने देंगे.


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