स्वच्छ गंगा के लिए स्वामी आत्मबोधानंद का 180 दिनों से अनशन, अब जल भी त्यागा

6:54 pm Published by:-Hindi News

स्वच्छ और निर्मल गंगा के लिए पिछले 180 दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी आत्मबोधानंद ने अब गंगा सफाई की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होती देख कर जल त्यागने का फैसला किया है। संत आत्माबोधानंद ने इस संबंध में पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है।

टीओआई से बातचीत में संत ने कहा, ‘मैंने गंगा की सफाई की सभी उम्मीद छोड़ दी है और इस पवित्र नदी के लिए अपनी जान देने में मुझे कोई डर नहीं है।’ अपने पत्र में स्वामी ने लिखा है कि गंगा की स्वच्छता के लिए अनेक संत प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार उनकी मांगों की ओर ध्यान दे रही है।

इस बारे में अपने 11 सूत्रीय पत्र में आत्मबोधानंद ने केंद्र सरकार को लिखा है कि आपकी गंगा-विरोधी मानसिकता ने मेरे पास कोई और विकल्प नहीं छोड़ा है। स्वामी ने अपने पत्र में मांग की है कि गंगा तथा इसकी सहायक नदियों के सभी मौजूदा और प्रस्तावित बांध रद्द कर दिए जाएं।

इसके अलावा उन्होंने गंगा बाढ़ के मैदानों में खनन और वनों की कटाई पर रोक लगाने, नदी के हित में निर्णय लेने के लिए एक स्वायत्त गंगा भक्त परिषद के गठन और नदी के संरक्षण के लिए गंगा अधिनियम को लागू करने की भी मांग की है।

आत्मबोधानंद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने दिवंगत संत जीडी अग्रवाल से किए गए वादे को भी पूरा नहीं किया। बता दें कि केंद्र सरकार ने हाइड्रो पॉवर प्रॉजेक्ट्स नहीं बनाने और खनन रोकने का वादा अग्रवाल से किया था लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नमामि गंगे के दिशा-निर्देशों के खिलाफ गंगा के बाढ़ मैदानों में खनन लगातार जारी है।

आत्मबोधानंद ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि पानी पीना छोड़ देना उनके प्रोटेस्ट का सबसे मजबूत फैसला है। उन्होंने कहा है कि गंगा के किनारे निर्माण कार्य वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक नहीं किया जा रहा है। गंगा का पानी लगातार अपना औषधीय गुण खोता जा रहा है और इसका पानी अब पीने लायक नहीं बचा है।

खानदानी सलीक़ेदार परिवार में शादी करने के इच्छुक हैं तो पहले फ़ोटो देखें फिर अपनी पसंद के लड़के/लड़की को रिश्ता भेजें (उर्दू मॅट्रिमोनी - फ्री ) क्लिक करें