Monday, December 6, 2021

सुषमा स्वराज ने बदले पासपोर्ट बनवाने के नियम, मिली कई बड़ी छुट

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हिन्दू-मुस्लिम दंपति तन्वी और अनस सेठ के पासपोर्ट विवाद के बाद अब भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पासपोर्ट बनवाने के कई नियमों को खत्म कर डाला। जिनमे एक अब मैरिज सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि विवाहित पुरुषों और महिलाओं ने शिकायत की थी पासपोर्ट बनवाने के लिए पासपोर्ट कार्यालय में उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट देना होता है, इसलिए पासपोर्ट के नियमों में बदलाव किया गया है।

सुषमा स्वराज ने आगे कहा कि कुछ तलाकशुदा महिलाओं ने शिकायत की थी कि पासपोर्ट फॉर्म पर उनके पूर्व-पति का नाम भरने के लिए कहा जाता था। इतना ही जो बच्चा तलाक के बाद उसके पूर्व पति के पास है उसका नाम भी भरने के लिए कहा जाता था। इसलिए हमने अब नियम में बदलाव कर दिऐ हैं।

इसके अलावा ‘पासपोर्ट सेवा’ ऐप भी शुरू किया गया है। ने बताया कि देश के किसी भी भाग से पासपोर्ट बनाने के लिए इस ऐप से अप्लाई किया जा सकता है। विदेश मंत्री के मुताबिक पुलिस उसी पते का वैरीफिकेशन करेगी जो ऐप पर दिया जाए। वेरीफ‍िकेशन सफल होने के बाद पासपोर्ट भी आपके इसी एड्रेस पर भेज दिया जाएगा।

सुषमा ने कहा, ‘सबसे ज्यादा दिक्कत जन्मतिथि को लेकर आती थी। इसके लिए जन्म प्रमाणपत्र मांगा जाता था लेकिन, अब हमने जन्मतिथि के लिए 7-8 ऐसे कागजात को शामिल कर दिया है जो इस मुश्किल को आसान कर देगा। अब अगर आधार, ड्राइविंग लाइसेंस या ऐसी ही सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त कागजात पर लिखे जन्मतिथि को मान लिया जाएगा।’

विदेश मंत्री ने कहा कि अनाथालय के बच्चों के लिए वहां का मुखिया जो जन्मतिथि देंगे वही मान्य होगा। साधु संन्यासियों के मामले में उनके माता-पिता की जगह गुरुओं के नाम मान्य होंगे। इसके अलावा तलाकशुदा पत्नी से उनके पूर्व पतियों के नाम भी अब पासपोर्ट के आवेदन पर नहीं पूछे जाएंगे।

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