डोकलाम विवाद पर चीन की और से भारत को लगातार युद्ध की धमकियाँ मिल रही है. चीनी राष्ट्रपति ने भी चीनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है तो वहीँ चीनी सेना भारतीय सीमाओं का उल्लंघन कर भारतीय हिस्सों में प्रवेश कर उकसावे की कार्यवाही कर रही है.

ऐसे में अब इस मुद्दें पर विदेशमंत्री सुषमा स्वराज का बयान आया है. संसद में दिए बयान में उन्होंने कहा कि हम हर संभव संबंधों को बेहतर कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान युद्ध से नहीं निकल सकता, बल्कि राजनयिक कोशिशों से निकलता है.

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सुषमा स्वराज ने कहा कि आज सामरिक क्षमता बढ़ाने से ज्यादा अहम है आर्थिक क्षमता को बढ़ाना. उन्होंने स्वीकार किया कि डोकलम मुद्दे को लेकर भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ा जरूर है. डोकलम ट्राई जंक्शन को लेकर भारत-चीन अपने अपने रुख पर कायम है. चीन हमसे सेना हटाने को कहता है. हमने 2012 के डोकलम नोट के हिसाब से दोनों ही पक्षों को पीछे हटने को कहा है. सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर हमारा पक्ष 1914 के ब्रिटेन-चीन समझौते के हिसाब से है.

सपा नेता रामगोपाल यादव के युद्ध की तैयारी के बयान पर उन्होंने कहा कि युद्ध से समाधान नहीं निकलता. सेना को तैयार रखना होता है. धैर्य और भाषा संयम और रणनीतिक रास्तों से हल निकालने की कोशिश की जा रही है. अब आर्थिक क्षमता से रास्ते देखे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पड़ोसियों को अपने विकास में मदद चाहिए.

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