नई दिल्ली | चार दिनों के भीतर हुई दो रेल दुर्घटनाओ ने रेल मंत्री सुरेश प्रभु को गहरा सदमा दिया है. इसलिए उन्होंने हादसों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी से इस्तीफे की पेशकाश की है. हालाँकि प्रधानमंत्री ने उनको अभी इन्तजार करने के लिए कहा है. इसी बीच खबर है की अगर सुरेश प्रभु का इस्तीफा मंजूर कर लिया जाता है तो रेल मंत्रालय का कार्यभार केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी को सौपा जा सकता है.

बुधवार को आजमगढ़ से दिल्ली जा रही 12225 (अप) कैफियत एक्सप्रेस एक डम्पर से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गयी. इस हादसे में 78 लोग घायल हो गए. जिनमे से 4 लोगो की हालत गंभीर बनी हुई है. पिछले चार दिनों में उत्तर प्रदेश में यह दूसरा रेल हादसा है. इससे पहले मुजफ्फरनगर के खतौली में हुई रेल दुर्घटना में 23 लोग मारे गए थे. इसके बाद से ही विपक्ष सुरेश प्रभु पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहा था.

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बुधवार को जैसे ही कैफियत एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई , सुरेश प्रभु ने मोदी से मुलाकात कर अपने इस्तीफे की पेशकश की. इसके बाद ट्वीट कर उन्होंने बताया की प्रधान्मत्नरी जी ने उनसे इन्तजार करने के लिए कहा है. हालाँकि इस ट्वीट में उन्होंने इस्तीफे की पेशकश करने की की बात नही लिखी लेकिन इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है की उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की.

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा,’ ‘मैं दुर्भाग्यपूर्ण हादसों से गहरे सदमे में हूं, जिनमें कई यात्रियों की जान गई और लोग जख्मी हुए हैं. इसने मुझे गहरा सदमा दिया है. प्रधानमंत्री ने जिस नए भारत की कल्पना की है, उसमें निश्चित रूप से रेलवे आधुनिक व सक्षम होनी चाहिए. मैं कहना चाहता हूं कि रेलवे उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है.’ उधर टाइम्स नाउ ने सूत्रों के हवालो से कहा की अगर प्रभु का इस्तीफा स्वीकार किया गया तो नितिन गडकरी को अगले मंत्रिमंडल विस्तार तक रेलवे मंत्रालय का प्रभार सौपा जा सकता है.

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