कथित तौर पर सिविल सर्विसेज में मुस्लिम समुदाय की कामयाबी को बदनाम करने के लिए प्रसारित किए जा रहे सुदर्शन टीवी के ‘UPSC जिहाद’ शो पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि  ‘सुदर्शन टीवी देश को नुकसान पहुंचा रहा है और ये स्वीकार नहीं कर रहा है कि भारत विविधता से मिलकर बना है।’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को कलंकित करने का है। हम केबल टीवी एक्ट के तहत गठित प्रोग्राम कोड के पालन को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं। एक स्थिर लोकतांत्रिक समाज की इमारत और अधिकारों और कर्तव्यों का सशर्त पालन समुदायों के सह-अस्तित्व पर आधारित है। किसी समुदाय को कलंकित करने के किसी भी प्रयास से निपटा जाना चाहिए। हमारी राय है कि हम पांच प्रतिष्ठित नागरिकों की एक समिति नियुक्त करें जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ मानकों के साथ आ सकते हैं। हम कोई राजनीतिक विभाजनकारी प्रकृति नहीं चाहते हैं और हमें ऐसे सदस्यों की आवश्यकता है जो प्रशंसनीय कद के हों।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘शो में एंकर की शिकायत ये है कि खास समुदाय के लोग सिविल सर्विस में आ रहे हैं। ये कितना घातक है? इस तरह के घातक आरोप UPSC परीक्षा पर भी लगे हैं। बिना किसी तथ्य के ये आरोप लगाए जा रहे हैं, इसे कैसे मंजूरी दी जा सकती है? क्या स्वतंत्र समाज में इस तरह के शो को मंजूरी दी जानी चाहिए?’

जस्टिस जोसेफ ने मीडिया की ओनरशिप को लेकर काफी अहम बात कही। उन्होंने कहा कि ‘हमें विजुअल मीडिया के ओनरशिप को देखना चाहिए। कंपनी का पूरा शेयरहोल्डिंग पैटर्न जनता को पता होना चाहिए। कंपनी का रेवेन्यू मॉडल की भी जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि सरकार किस कंपनी में ज्यादा विज्ञापन दे रही है और किसमें कम।’ उन्होने ये भी कहा कि ‘हमें टीवी डिबेट में एंकर की भूमिका को भी देखना चाहिए। डिबेट में एंकर बोलने के लिए कितना टाइम लेता है? वो बोलने वाले के ऑडियो को म्यूट कर देते हैं और सवाल पूछते हैं।’

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘सुदर्शन टीवी देश को नुकसान पहुंचा रहा है और ये स्वीकार नहीं कर रहा है कि भारत विविधता से मिलकर बना है। सुदर्शन न्यूज को अपनी स्वतंत्रता का सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए।’ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट होने के नाते हम आपको ये कहने की मंजूरी नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सर्विस में घुसपैठ कर रहे हैं। आप ये नहीं कह सकते है कि पत्रकार के पास ये कहनी की खुली छूट है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बीच सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पत्रकार की स्वतंत्रता सुप्रीम है। प्रेस को कंट्रोल करने की कोई भी कोशिश लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक साबित होगी।  फिर इसके बरक्स एक समानांतर मीडिया भी है जहां लैपटॉप लिए एक शख्स एक बार में लाखों लोगों से संवाद स्थापित कर सकता है।

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम सोशल मीडिया की बात नहीं कर रहे हैं। अगर एक जगह रेगुलेशन नहीं हो सकते, तो इसका मतलब यह नहीं कि कहीं भी रेगुलेशन ना हो। जस्टिस के एम जोसेफ ने कहा कि मीडिया की आजादी बेलगाम नहीं हो सकती। मीडिया को उतनी ही आजादी हासिल है जितनी देश के किसी दूसरे नागरिक को।

कोर्ट ने सुदर्शन टीवी की ओर से पेश हुए वकील श्याम दीवान से कहा कि आपके मुवक्किल देश के साथ गलत कर रहे हैं। उन्हें अपनी अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार को सावधानी के साथ अमल में लाने की जरूरत है। उन्हें समझना होगा कि हिंदुस्तान विविध संस्कृतियों का संगम है।

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