ट्रिपल तलाक पर आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जमीयत उलेमा ए हिंद ने शरीअत के खिलाफ करार दिया. साथ ही कहा कि धार्मिक अधिकार संविधान में दिए मौलिक अधिकारों का हिस्सा हैं और इनको लेकर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

जमीयत ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस्लामिल शरियत के खिलाफ है और यह मुस्लिम समुदाय के लिए चिंता का विषय है. संगठन के महासचिव महमूद मदनी ने कहा, ‘कोर्ट के फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकारों में शामिल है और भारतीय संविधान इसकी सुरक्षा की गारंटी देता है.

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जमीयत ने कहा, ‘‘फैसले के सम्बन्ध में नकारात्मक आशंकाओं के मद्देनजर जमीयत यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि भारतीय संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों ,जो हमारे मौलिक अधिकारों का भाग हैं, पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.

बयान में कहा गया, न्यायालय के फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकारों में शामिल है और भारतीय संविधान इसकी सुरक्षा की गारंटी देता है. साथ ही मुस्लिमों से अपील की गई कि मुसलमान अनिवार्य परिस्थितियों के अलावा तलाक न दें, क्योंकि शरीयत की दृष्टि से तलाक बहुत बुरी चीज है.

गौरतलब रहें कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कल बहुमत के निर्णय में मुस्लिम समाज में एक बार में तीन बार तलाक देने की प्रथा को निरस्त करते हुये इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और अमान्य करार दिया.

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