नई दिल्ली | बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में आज सुप्रीम कोर्ट अहम् सुनवाई करने वाला है. इस मामले में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी समेत 13 नेताओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है. करीब 25 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट आज यह तय करेगा की आडवाणी समेत बाकी नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए या नही.

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट बुधवार को मामले की सुनवाई करने वाला था लेकिन किन्ही कारणों से सुनवाई को एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया. जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. इससे पहले कोर्ट ने कहा था की हम टेक्निकल आधार पर किसी को राहत देना मंजूर नही कर सकते. कोर्ट की इस टिप्पणी से संकेत मिले थे की अदालत सभी नेताओं पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दे सकते है.

सीबीआई और हाजी महबूब अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने काह था की वो इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट की मंजूरी देते है. इसके अलावा कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो जगह होने पर भी सवाल उठाये थे. उन्होंने कहा था की आखिर क्यों न रायबरेली में चल रही सुनवाई को भी लखनऊ स्थान्तरित कर दिया जाए. मालूम हो की बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने के मामले में मुख्य सुनवाई लखनऊ बेंच में हो रही है.

इसके अलावा दूसरा मुकदमा रायबरेली कोर्ट में चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर वकीलों ने सफाई दी की दोनों जगह अलग अलग आरोपीयो के खिलाफ सुनवाई चल रही है और दोनों ही जगह ट्रायल एडवांस स्टेज में पहुँच चूका है. बाबरी ढांचा ढहाए जाने के बाद रायबरेली में ही यूपी के सीएम रहे कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत बीजेपी-वीएचपी के 13 लीडर्स पर आपराधिक साजिश रचने (120बी) का केस दर्ज किया गया था.

जबकि कारसेवको के खिलाफ लखनऊ में केस दर्ज किया गया था. सुनवाई के बाद रायबरेली की लोअर कोर्ट ने सभी 13 नेताओ को बरी कर दिया था. 2010 में इलाहबाद कोर्ट ने भी रायबरेली कोर्ट के आदेश को बरक़रार रखा था. सीबीआई और हाजी महबूब अहमद ने इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

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