नई दिल्ली | अयोध्या के बाबरी मस्जिद विधवंस मामले में सुप्रीम कोर्ट 22 मार्च को अंतिम फैसला सुनाएगा. इसी दिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी , मुरली मनोहर जोशी, केन्द्रीय मंत्री उमा भारती और कल्याण सिंह के भाग्य का फैसला होगा. मालूम हो की बीजेपी के ये सभी नेता बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आरोपी है. हालांकि इलाहाबाद हाई कोर्ट सभी आरोपियों से मस्जिद विध्वंस का षड्यंत्र रचने के आरोप हटा चूका है.

सोमवार को सीबीआई और हाजी महबूब अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के लिए अंतिम तारीख दे दी. जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस आरएफ नरीमन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ट्रायल में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कहा की न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अगर जरूरत पड़ी तो संयुक्त ट्रायल भी चलाया जा सकता है.

मालूम हो की 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या की बाबरी मस्जिद को कारसेवको ने गिरा दिया था. आरोप है की बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता इस विध्वंस में शामिल थे. इनमे लाल कृष्ण आडवाणी , मुरली मनोहर जोशी , कल्याण सिंह, विनय कटियार और उमा भारती का नाम शामिल है. सभी नेताओ पर आरोप है की उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए कारसेवको को भड़काया.

मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई की विशेष अदालत ने बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेताओ पर से षड्यंत्र रचने का आरोप हटा दिया जिसको इलाहबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी. साल 2010 में हाई कोर्ट ने विशेष अदालत के आदेश को बरकरार रखा. बाद में सीबीआई ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. अगर सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट के फैसले को बदल देती है तो सभी बीजेपी नेताओ के खिलाफ पुराने मामले फिर से खोले जा सकते है.

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