supreme court

नई दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राफेल डील की कीमत और से डील से सबंधी सुनवाई हुई। आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह, बीजेपी नेता अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील एम एल शर्मा की याचिका पर बहस पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

इस दौरान अदालत ने केंद्र को राहत देते हुए कहा कि जब तक हम तय नहीं करते, तब तक सरकार को याचिकाकर्ताओं को राफेल की कीमतों के बारे में जानकारी देने की जरूरत नहीं है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सरकार से 2015 में ऑफसेट गाइडलाइन बदलने पर सवाल किया। सरकार ने कहा कि ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट मुख्य सौदे के साथ-साथ चलता है।

वहीं एयर वाइस मार्शल चेलापति ने कहा कि वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के विमानों की जरूरत है, इसलिए राफेल का चयन किया गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा- राफेल डील में बदलाव किया गया, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते थे कि ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट अंबानी की कंपनी को दिया जाए।

मामले में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की तरफ से पेश वकील ने पीठ से कहा कि 36 लड़ाकू विमान की कीमत सरकार संसद में दो बार सार्वजनिक कर चुकी है। ऐसे में सरकार का यह कहना कि लड़ाकू विमान की कीमत की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, यह स्वीकार करने योग्य नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा ने कोर्ट से कहा कि सरकार की ओर से अदालत में पेश की गई रिपोर्ट से खुलासा होता है कि यह एक गंभीर घोटाला है। उन्होंने यह केस पांच जजों की बेंच के पास ट्रांसफर करने की अपील की।

बता दें कि केंद्र सरकार ने सोमवार को सीलबंद लिफाफे में राफेल डील की कीमत सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है। जबकि राफेल डील के ठेके से जुड़े निर्णय प्रक्रिया के दस्तावेज की एक प्रति याचिकाकर्ताओं को दी गई है।

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