देशभर में दूध में मिलावट का सिलसिला इस कदर जारी है की खुद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर ध्यान देते हुए मिलावट करने वालो के लिए उम्र कैद की सज़ा का समर्थन किया है.अभी तक दूध में मिलावट करने वालों को छह महीने जेल की सजा या जुर्माने का प्रावधान था।

जीफ जस्टिस टी. एस. ठाकुर, जस्टिस आर. भानुमती और यू. यू. ललित की एक बेंच ने कहा कि दूध में मिलावट और सिंथेटिक दूध की समस्या से निपटना जरूरी हो गया है। इससे बच्चों की ग्रोथ पर फर्क पड़ता है और अगली पीढ़ी की बौद्धिक क्षमता भी प्रभावित होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मौजूदा नरम कानूनों को बदलकर दूध में मिलावट करने वालों को उम्र कैद की सजा का प्रावधान करने के लिए कहा है। बेंच ने कहा कि उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बंगाल ने पहले से ही कड़े कानून बनाए हैं इसलिए अन्य राज्यों को भी इनका अनुसरण करना चाहिए।

गौरतलब है की FSSAI ने 2011 में प्राकशित अपनी एक रिपोर्ट में बताया था की बाज़ार में बिकने वाला में 68 प्रतिशत दूध मिलावटी होता है रिपोर्ट में कहा गया था कि मिलावटी दूध के मामले सबसे ज्यादा बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बेंगाल, मिजोरम, झारखंड, और दमन-दीव में पाए गए हैं। कोर्ट ने यह आदेश अलग-अलग राज्य के लोगों की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। इन याचिकाओं में मिलावट के खिलाफ कड़े कानून बनाने की मांग की गई थी।

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