नागालिग से रेप के आरोपी आसाराम के केस में गुजरात सरकार द्वारा ट्रायल को लटकाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया हैं. कोर्ट ने गुजरात सरकार से कहा है कि आसाराम के खिलाफ ट्रायल को लटकाए ना रखें. इस मामलें में आसाराम और उनके पुत्र के खिलाफ सूरत की दो बहनों ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था.

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘इस मामले को लटकाएं नहीं. हम आपसे कहना चाहते हैं कि गवाही दर्ज करने का काम तेजी से किया जाए.’ मामले की अगली सुनवाई अब चार हफ्ते बाद होगी.

वहीँ गुजरात सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि इस मामले में अभियोजन पक्ष के दो गवाहों की हत्या की जा चुकी है. गुजरात सरकार ने कोर्ट में कहा कि 29 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और 46 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं.

इसके अलावा याचिकाकर्ता ने कोर्ट को जानकारी दी कि हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों की तरफ से मामले में अभी कोई जवाब दाखिल नहीं हुआ है, ऐसे में उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए, क्योंकि उनको जान का खतरा बना हुआ है.

दरअसल-आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी को ठुकराते हुए कहा था कि जब तक केस के गवाहों के बयान ट्रायल कोर्ट में दर्ज नहीं हो जाते, वह मामले की सुनवाई नहीं करेगा. आसाराम 2013 से जेल में बंद हैं.

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