नई दिल्ली | केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद देश के कई राज्यों में गौरक्षा के नाम पर खूब गुंडागर्दी हो रही है. कभी गुजरात के उना में दलितों को गाडी के पीछे बांधकर पीटा जाता है, कभी फरीदाबाद में किसी को गौमूत्र और गोबर खाने पर मजबूर किया जाता है तो अभी एक हफ्ते पहले हुई घटना जिसमे सरकार से गाय खरीद कर ले जारे लोगो को गौतस्कर बताकर बेरहमी से पीटा जाता है. जिसमे एक 50 वर्षीय शख्स पहलु खान की मौत हो जाती है.

बड़ी बात यह है की इतनी सारी घटनाये सामने आने के बाद भी न तो राज्य सरकारे और न ही केंद्र सरकार, गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी कर रहे इन कथित गुंडों पर कोई कार्यवाही करती है. पिछले साल दादरी में अख़लाक़ की हत्या से जहाँ देश सहम उठा था वही इस साल अलवर में पहलु खान की मौत ने एक बार फिर इस मुद्दे को गरमा दिया है. अब इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 6 राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है.

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कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से पुछा है की आखिर क्यों न गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले इन संगठनो पर बैन लगा दिया जाये? कोर्ट ने 3 मई तक नोटिस का जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. उसी दिन मामले की अगली सुनवाई की जाएगी. जिन राज्य को नोटिस भेजे गए है उनमे गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी, राजस्थान, झारखण्ड और कर्नाटक शामिल है.

पूनावाला ने अपनी याचिका में करीब 10 घटनाओ को जिक्र किया. इन सभी घटनाओ में गौहत्या और गौतस्करी के नाम पर हिंसा की गयी. इनमे उना में हुई दलितों की पिटाई से लेकर पिछले हफ्ते अलवर में हुई घटना का जिक्र किया गया है. पूनावाला ने गौरक्षक दलों की तुलना प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी से की है. उन्होंने कहा की ऐसे संगठनों से अल्पसंख्यक और दलित वर्ग भयभीत है. इसलिए ऐसे संगठनो पर बैन लगाना चाहिए.

पूनावाला ने कहा है की मैंने सुप्रीम कोर्ट में इसलिए गुहार लगाई है क्योकि केंद्र सरकार ऐसे संगठनों से निपटने में नाकाम रही है. इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा की सरकारे इन संगठनों को संरक्षण देती है इसलिए इनको वैधता मिली हुई है. यह बड़ी दुर्भाग्य की बात है. उधर अलवर मामले में विपक्ष ने संसद में आज भी हंगामा जारी रखा. विपक्ष मुख़्तार अब्बास नकवी से माफ़ी की मांग पर अडा हुआ है.

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