Thursday, August 5, 2021

 

 

 

फिर टली बाबरी मस्जिद केस की सुनवाई, SC चाहता है अपनी निगरानी में मध्यस्थता

- Advertisement -
- Advertisement -

अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक को लेकर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘यह निजी संपत्ति का विवाद नहीं है। यह काफी विवादास्पद हो गया है। हम मध्यस्थता पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यहां तक कि अगर केवल 1% मौका है, तो यह किया जाना चाहिए।’

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा है कि मध्यथता के विकल्पों को आठ हफ्ते के भीतर तलाशा जाए, जो पूरी तरह गोपनीय हो और उस पर मीडिया में बहस न हो। सुप्रीम कोर्ट पांच मार्च को मध्यथता को लेकर आदेश जारी करेगा कि ये संभव है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अनुवाद की जांच के लिए आठ हफ्ते का वक्त दिया है। आठ हफ्ते के बाद इस मामले की सुनवाई होगी।

उधऱ, हिंदू पक्षकारों ने मध्यथता के जरिए समझौते का विरोध किया है। कहा कि पहले भी शंकराचार्य कोशिश कर चुके हैं, मगर बात नहीं बन सकी। जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वे जनहित में इसके लिए तैयार हैं। जस्टिस बोबड़े ने अपनी टिप्पणी में कहा ‘यह कोई निजी संपत्ति को लेकर विवाद नहीं है, मामला पूजा-अर्चना के अधिकार से जुड़ा है। अगर समझौते के जरिए 1 फीसदी भी इस मामले के सुलझने की गुंजाइश हो, तो इसकी कोशिश होनी चाहिए।’

जस्टिस बोबड़े के इस ऑफर पर मुस्लिम पक्षकारो की ओर से पेश वकील राजीव धवन धवन ने सफलता पर शक जताया। धवन ने कहा – ये गंभीरता से हो। मीडिया भी रिपोर्ट न करे। रामलला की ओर से पेश वकील वैद्यनाथन – पहले ऐसी कई कोशिश विफल हुई हैं।

चीफ जस्टिस ने मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वकील राजीव धवन से पूछा- दस्तावेजों के अनुवाद को परखने में कितना वक़्त लेंगे। राजीव धवन, 8-12 हफ्ते क् वक़्त लगेगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट में बताया गया कि अभी भी हजारों पेज के दस्तावेजों के अनुवाद को कोर्ट के ऑफिसियल ट्रांसलेटर द्वारा अनुवाद किया जाना बाक़ी है। इसलिए चीफ जस्टिस ने सभी पक्षकारों से पूछा है कि क्या वो यूपी सरकार और दूसरे पक्षकारो से कराये गए अनुवाद को स्वीकारने के लिए तैयार है या नहीं।

चीफ जस्टिस ने कहा, जब सब पक्षकार दस्तावेजों के सही अनुवाद को लेकर निश्चिंत हो जायेंगे, हम सुनवाई शुरू कर सकते है। चीफ जस्टिस ने साफ किया कि एक् बार जब हम अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू कर देंगे, हम नहीं चाहते कि कोई भी पक्षकार दस्तावेजों के अनुवाद में खामी का हवाला देकर सुनवाई टालने की मांग करे। सेकेट्री जनरल ने दस्तावेजों के अनुवाद को लेकर कोर्ट की रिपोर्ट सौंप दी है। चीफ जस्टिस ने कहा- सेक्रेट्री जनरल की रिपोर्ट की कॉपी सभी पक्षकारो के वकीलो को सौंपी जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles