सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें गोधरा दंगों के बाद वर्ष 2002 के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों के पुननिर्माण एवं मरम्मत के लिए राज्य सरकार को पैसों के भुगतान करने का आदेश दिया था.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस पीसी पंत की बेंच ने ईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि धार्मिक स्थल के निर्माण या मरम्मत के लिए सरकार करदाता के पैसे को नहीं खर्च कर सकती. अगर सरकार मुआवजा देना भी चाहती है तो उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि को उसे भवन मानकर उसकी क्षतिपूर्ति की जा सकती है.

दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा कांड के बाद राज्य में हुंए दंगों में क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों को लेकर सरकार को मुआवजा देने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने राज्य के सभी 26 जिलों में दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों की लिस्ट बनाने को कहा था.

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता इस्लामिक रिलीफ सेंटर की तरफ से दावा किया गया था कि ऐसे स्थलों की संख्या लगभग 500 है. जबकि राज्य सरकार ने इसे कम बताया था. इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि धर्मस्थलों की सुरक्षा राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है. सरकार की गैरजिम्मेदारी से हुए नुकसान की उसे भरपाई करनी चाहिए। लेकिन अदालत इस दलील से सहमत नहीं हुई.

सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 27 के तहत करदाता को ये अधिकार दिया गया है कि उससे किसी धर्म को प्रोत्साहन देने के लिए टैक्स नहीं लिया जा सकता. ऐसे में, धर्मस्थलों के निर्माण के लिए सरकारी ख़ज़ाने से पैसा देना गलत होगा.

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