Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

बाबरी मस्जिद केस में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पर रखा फैसला सुरक्षित

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नई दिल्ली: अयोध्या मामले में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संविधान पीठ ने इस मामले की बुधवार को सुनवाई की। हालांकि, अभी सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं बताया कि वह इस पर फैसला कब सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद उनसे मध्यस्थों के नाम मांगे हैं।

दरअसल, सुनवाई की शुरुआत में हिंदू महासभा ने पीठ से कहा जनता मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं होगी। तो इस पर संविधान पीठ ने कहा कि आप कह रहे है कि इस मसले पर समझौता नहीं हो सकता। जस्टिस बोबड़े ने हिंदू महासभा से कहा- आप कह रहे हैं कि समझौता फेल हो जाएगा। आप प्री जज कैसे कर सकते हैं ?

संविधान पीठ ने कहा यह केवल जमीन का विवाद नहीं है, यह भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यह दिल दिमाग और हीलिंग का मसला है। इसलिए कोर्ट चाहता है कि आपसी बातचीत से इसका हल निकले।

babri masjid

बोबड़े ने कहा, ‘हमें इतिहास पता है। हम आपको (पक्षकारों को) बताना चहते हैं कि अतीत में जो हुआ, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं है। चाहे वह बाबर का हमला हो या ये कि किसने इसे (अयोध्या का ढांचा) गिराया। कोई भी उसे (अतीत की घटना को) बदल नहीं सकता। हम सिर्फ़ वह बदल सकते हैं जो सामने है। और वह है, विवाद।’

मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने भी मध्यस्थता की कोशिश पर सवाल उठाया। साथ ही यह भी कहा कि अदालत को किन्हीं लोगों या समुदाय की ‘भावनाओं’ के साथ नहीं बहना चाहिए। इस पर बेंच के एक अन्य सदस्य जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कहना था, ‘भावनाएं तो इस तरह के सभी मामलों में होती हैं। सबरीमला मामले में भी थीं। लेकिन फिर भी इस वक़्त मध्यस्थता की कोशिश का उद्देश्य सिर्फ़ ये अनुमान लगाना है कि इसमें आपसी समझौते की कोई गुंज़ाइश अब भी बची है या नहीं।’

रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया अयोध्या का मतलब राम जन्मभूमि। इस मामले का बातचीत से हल नहीं हो सकता। मस्जिद किसी दूसरे स्थान पर बन सकती है. इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप अपना यह पक्ष मध्यस्थता के दौरान रख सकते हैं। इस पर रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि फिर मध्यस्थता का मतलब क्या है?

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