Sunday, December 5, 2021

गोरक्षकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले – नहीं होनी चाहिए हिंसा की वारदातें

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को देश भर में गौरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। साथ ही ये भी कहा कि भीड़ हिंसा पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी राज्यों की है।

कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इस मामले की घटना रोकने के लिए जल्द ही सभी राज्यों को एक सख्त गाइडलाइन जारी की जाएगी। वहीं इन मामलों में मुआवजा राशि भी तय की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में एक विस्तृत फैसला सुनाएगी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा कि गौरक्षा के नाम पर हिंसा की वारदातें नहीं होनी चाहिए। चाहे कानून हो या नहीं, कोई भी ग्रुप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। दीपक मिश्रा ने कहा कि ये राज्यों का दायित्व है कि वो इस तरह की वारदातें ना होने दें।

वहीं सुनवाई के दौरान इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट को बताया कि अब तो असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ गया है। वो गाय से आगे बढ़कर बच्चा चोरी का आरोप लगाकर खुद ही कानून हाथ मे लेकर लोगों को मार रहे हैं। महाराष्ट्र में ऐसी घटनाएं हुई हैं।

मॉब लिंचिंग के पीड़ितों को मुआवज़े के लिए इंदिरा जयसिंह ने कहा कि धर्म, जाति और लिंग को ध्यान मे रखा जाए। चीफ जस्टिस ने कहा ये उचित नहीं है। पीड़ित सिर्फ पीड़ित होता है और उसे अलग-अलग खांचे में नहीं बांटा जा सकता।

अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने कहा कि केंद्र इन मामलों पर नजर बनाए हुए है और इन पर लगाम लगाने की भी कोशिशें कर रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने की है।

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