तीन तलाक के मामले को सुप्रीम कोर्ट में एक और नई याचिका दायर की गई. हालांकि कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. इस याचिका में ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहु विवाह की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी.

चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा, ”हमारा मानना है कि इस याचिका में उठाए गए मुद्दे पहले ही इस अदालत के विचाराधीन हैं. ऐसे में समान मुद्दे एक अन्य याचिका पर सुनवाई करना आवश्यक नहीं है.”

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बेंच ने कहा, ”यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि लंबित याचिकाओं में आने वाला फैसला मौजूदा याचिका पर भी लागू होगा.”

याचिकाकर्ता के वकील सौम्य चक्रवर्ती ने कहा कि तलाक के तीनों रूप (अहसान तलाक, हसन तलाक और तलाक-उल-बिद्दत) मनमाना, मनमौजी और मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले हैं. जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत उन्हें दिए गए हैं.

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