Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की देश का नाम ‘इंडिया’ से बदलकर ‘भारत’ करने की मांग

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत करने की मांग करनेवाली याचिका  पर विचार करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, याचिका को संबंधित अथॉरिटी प्रतिवेदन की तरह देखेगी इसके लिए संबंधित मंत्रालय के सामने याचिका भेजी जाए।

इस दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि संविधान में भी भारत नाम है। उसमें लिखा है कि ’इंडिया दैट इज भारत’। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इंडिया ग्रीक शब्द इंडिका से आया है और इस नाम को हटाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से वकील राजकिशोर चौधरी ने कहा कि देश को मूल और प्रामाणिक नाम भारत द्वारा मान्यता दी जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया था कि संविधान की धारा 1 में संशोधन करने की जरूरत है। इस संशोधन के जरिये इस देश का नागरिक अपने औपनिवेशिक इतिहास को अंग्रेजी नाम को हटाने के रूप में प्राप्त करेंगे, जो एक राष्ट्रीय भावना पैदा करेगा। याचिका में कहा गया था कि इंडिया नाम को हटाने में भारत संघ की ओर से विफलता हुई है जो गुलामी की प्रतीक है।

जब याचिकाकर्ता ने लगातार ये दलील रखी और सुप्रीम कोर्ट का रुख याचिका सुनने के लिए नहीं दिखा तो याचिकाकर्ता ने कहा कि इस याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर संबंधित मंत्रालय के सामने भेजने की इजाजत दी जाए। तब सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी।

बता दें कि 2016 में भी तत्कालीन चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा था कि प्रत्येक भारतीय को देश का  नाम अपने अनुसार, लेने का अधिकार है चाहे तो वे ‘इंडिया’  बोले या  ‘भारत’  बोले। इसके लिए फैसला लेने का सुप्रीम कोर्ट को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा था, ‘यदि कोई भारत कहना चाहे तो भारत कहे और यदि इंडिया कहना चाहे तो देश का नाम इंडिया कहे। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।’

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