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सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल में बाहरी मुस्लिमों के नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है और उसको ऐसा ही बना रहने दिया जाए और उसकी खूबसूरती को नुकसान ना पहुंचे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पर्यटक या बाहर से आए लोग कहीं दूसरी जगह नमाज अदा कर सकते हैं। बता दें कि ताजमहल में नमाज पढ़े जाने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति ने अक्टूबर 2017 में ताजमहल में होने वाली नमाज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।

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इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में मांग की गई थी आगरा के बाहर के मुस्लिमों को भी नमाज अदा करने की इजाजत दी जाए।

याचिका में आगरा के ADM सिटी के 24 जनवरी को उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें कहा गया था कि आगरा से बाहर के लोगों को ताजमहल में बनी मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

याचिकाकर्ता की दलील थी कि ताजमहल की मस्जिद में हर शुक्रवार दोपहर एक से दो बजे के बीच स्थानीय लोगों को नमाज अदा करने की इजाजत है लेकिन बाहर से आए लोगों को वहां नमाज की अनुमति नहीं है जबकि रोजाना हजारों पर्यटक ताज में आते हैं। ऐसे में उन्हें भी नमाज अदा करने की इजाजत दी जानी चाहिए।

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