Sunday, October 24, 2021

 

 

 

SC ने नहीं दी मुहर्रम पर ताजिया निकालने की इजाजत, कहा – अनुमति दी तो फिर बनेंगे निशाना

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कोरोना महामारी के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Hearing Today) ने मुहर्रम जुलूस (Muharram Processions News) निकालने की अनुमति की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि ताजिया निकालने की अनुमति अगर दे दी जाती है और कोरोना महामारी फैलती है तो फिर से एक खास तबके के लोगों को निशाना बनाया जाएगा और इससे अराजकता फैलेगी।

बता दें कि शिया धर्मगुरू मौलान कल्बे जव्वाब ने पूरे देश में मुहर्रम जुलूस निकालने की मांग वाली याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पूरे देश पर लागू होने वाला कोई आदेश नहीं दे सकते। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की पीठ ने कहा कि मुहर्रम जुलूस के लिए कोई स्पष्ट स्थान नहीं होता है, जहां प्रतिबंध या सावधानी बरती जा सके।

कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने जगन्नाथपुरी यात्रा की दलील दी तो अदालत ने कहा कि आप पूरे देश के लिए इजाजत मांग रहे हैं। जगन्नाथपुरी यात्रा एक खास जगह पर होती है, जहां रथ एक जगह से दूसरी जगह जाता है। अगर किसी एक जगह की बात होती तो हम खतरे का आकलन कर आदेश दे सकते थे।

वकील ने कोर्ट से मुहर्रम के धार्मिक महत्व को बताते हुए मामले पर विचार की दरख्वास्त की। लेकिन कोर्ट ने कहा, “आप हमारी दिक्कत नहीं समझ रहे हैं। पूरे देश के लिए कोई एक आदेश नहीं दिया जा सकता है। हर जगह जुलूस का आदेश दे दिया गया तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। कल को एक समुदाय विशेष पर लोग कोरोना फैलाने का आरोप लगाएंगे। ऐसी स्थिति की अनुमति नहीं दी जा सकती है।“

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि लखनऊ में शिया समुदाय की सबसे ज्यादा आबादी है। कम से कम सुप्रीम कोर्ट वहां पर जुलूस निकालने की अनुमति दे दे। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा अगर बात सिर्फ लखनऊ में जुलूस निकालने की है तो इस पर सुनवाई की उचित जगह इलाहाबाद हाईकोर्ट है। आप वहां जा सकते हैं।

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