सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल के संरक्षण को लेकर मोदी सरकार को आज कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार से साफ शब्दों में कहा कि अगरआप इमारत को सहेज नहीं सकते, तो इसे ढहा दीजिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एफ़िल टॉवर को देखने 80 मिलियन लोग आते है, जबकि ताजमहल के लिए मिलियन लोग आते है। आप लोग ताजमहल को लेकर गंभीर नहीं है और न ही आपको इसकी परवाह है। हमारा ताज ज्यादा खूबसूरत है और आप टूरिस्ट को लेकर गंभीर नहीं है। ये देश का नुकसान है, ताजमहल को लेकर घोर उदासीनता है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा-क्या आपको पता है कि आपकी उदासीनता से देश को कितना बड़ा नुकसान हो रहा है? जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने उत्‍तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि ताजमहल के आसपास उद्योगों को बढ़ाने के लिए अनुमति क्‍यों दी गई? सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड के चेयरमैन को नॉटिस जारी किया।

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इस दौरान केंद्र ने पीठ को बताया कि आईआईटी-कानपुर ताजमहल और उसके आसपास वायु प्रदूषण के स्तर का आकलन कर रहा है और चार महीने में अपनी रिपोर्ट देगा। केंद्र ने यह भी बताया कि ताजमहल और उसके इर्दगिर्द प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने के लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है, जो इस विश्व प्रसिद्ध स्मारक के संरक्षण के उपाय सुझाएगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1996 में पहली बार ताजमहल को लेकर आदेश जारी किया लेकिन 22 साल बाद भी कुछ नहीं हुआ। इससे पहले 9 मई को सुप्रीम कोर्ट ने ASI को फटकार लगाई थी।

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