केरल के चर्चित केस हादिया उर्फ़ अखिला अशोकन मामले में आज फिर देश की सर्व्वोच अदालत के समक्ष सुनवाई हुई.  इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हाईकोर्ट ने इस शादी को शून्य कैसे करार दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि कोर्ट ये नहीं कह सकता कि शादी सही है या गलत. साथ ही कोर्ट ने कई गंभीर सवाल भी खड़े किये. कोर्ट ने कहा कि क्या सहमति से की गई शादी की चलती- फिरती जांच कराई जा सकती है? इस मामले में अब 8 मार्च को सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा, अगर सरकार के पास ये जानकारी है कि किसी को तस्करी के जरिए विदेश भेजा जा रहा है तो सरकार के पास ये शक्ति है कि उसे विदेश जाने से रोका जा सके. लेकिन, दो बालिग व्यक्तियों द्वारा मर्जी से शादी का मामला कहां से आ गया?

ध्यान रहे बीती सुनवाई में हादिया ने 25 पेज का हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह मुसलमान है और मुसलमान के तौर पर ही अपनी जिंदगी जीना चाहती है और वह शफीन जहां की पत्नी ही बनी रहना चाहती है. हादिया ने ये भी कहा कि अभी वह आजादी नहीं है, जबकि वह आजादी की हकदार हैं. अभी भी वह पुलिस की निगरानी में है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच हादिया ने कोर्ट से आग्रह किया है कि उसकी आजादी को बहाल किया जाए.

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