Tuesday, June 22, 2021

 

 

 

आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल – कितनी पीढ़ियों तक चलता रहेगा?

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महाराष्ट्र में मराठ आरक्षण लागू किये जाने को लेकर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पूछा कि कितनी पीढ़ियों तक नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण चलता रहेगा।  कोर्ट ने 50 प्रतिशत की सीमा हटाए जाने की स्थिति में पैदा होने वाली असमानता को लेकर भी चिंता प्रकट की।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा कि कोटा की सीमा तय करने पर मंडल मामले में (शीर्ष न्यायालय के) फैसले पर बदली हुई परिस्थितियों में पुनर्विचार करने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट में मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करने वाले महाराष्ट्र के कानून के पक्ष में दलील देते हुए रोहतगी ने मंडल मामले में फैसले के विभिन्न पहलुओं का हवाला दिया। रोहतगी ने कहा कि न्यायालयों को बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर आरक्षण कोटा तय करने की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ देनी चाहिए और मंडल मामले से संबंधित फैसला 1931 की जनगणना पर आधारित था।

रोहतगी ने कहा कि मंडल फैसले पर पुनर्विचार करने की कई वजह हैं, जो 1931 की जनगणना पर आधारित था, साथ ही, आबादी कई गुना बढ़ा कर 135 करोड़ पहुंच गई है। इस पर पीठ ने कहा “देश की आजादी के 70 साल गुजर चुके हैं और राज्य सरकारें कई सारी कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। तो क्या मान लिया जाये कि इतने सालों में कोई विकास नहीं हुआ? कोई पिछड़ी जाति आगे नहीं बढ़ी है।” कोर्ट ने कहा कि मंडल से जुड़े फैसले की समीक्षा करने पर जो लोग पिछड़ेपन से जो बाहर निकल चुके हैं। उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए।

मुकुल रोहतगी ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का केंद्र सरकार का फैसला भी 50 फीसदी की सीमा का उल्लंघन करता है। इस पर जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस रविंद्र भट की पीठ ने कहा “अगर 50 फीसदी की सीमा या कोई सीमा नहीं रहती है, जैसा कि आपने सुझाया है, तब समानता की क्या अवधारणा रह जाएगी।”

पीठ ने कहा “आखिरकार, हमें इससे निपटना होगा। इस पर आपका क्या कहना है, इससे पैदा होने वाली असमानता के बारे में क्या कहना चाहेंगे। आप कितनी पीढ़ियों तक इसे जारी रखेंगे।” बता दें कि शीर्ष न्यायालय बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले और सरकारी नौकरियों में मराठा समुदाय को आरक्षण देने को कायम रखा गया था।

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