केरल के चर्चित हदिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टिपण्णी करते हुए कहा कि लड़की 24 साल की है ऐसे में उसे पिता द्वारा नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता. साथ ही हाईकोर्ट के उस फैसले पर भी विचार करेना का फैसला लिया है जिसमे हिन्दू युवती ने धर्मपरिवर्तन कर मुस्लिम लड़के से शादी की थी जिसे बाद में हाईकोर्ट ने रद्द दिया था.

ध्यान रहे केरल हाईकोर्ट ने शफीन और हादिया के विवाह को ‘लव जिहाद’ का नाम देते हुए अमान्य घोषित कर दिया था. साथ ही लड़की को उसके घरवालों के पास भेज दिया था. जिसके बाद उसके पति शफ़ीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कोर्ट के उस आदेश को वापस लेने की मांग की है. जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेन्सी (NIA) को यह पता लगाने के लिए कहा गया था कि क्या इस मामले में कथित ‘लव जिहाद’ का व्यापक पैमाना है या नहीं.

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इसके अलावा सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने केरल हाईकोर्ट से फैसले पर जवाब माँगा है. अब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए. एम खानविलकर और जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ नौ अक्टूबर को शफीन की अर्जी पर विचार करेगी.

शफीन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने दलील दी कि बहुधर्मी समाज में शीर्ष अदालत को इस मामले की राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को जांच का आदेश नहीं देना चाहिए था. उन्होंने इस आदेश को वापस लेने के लिये दायर अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग की है.

इस पर पीठ ने कहा, “सवाल यह है कि क्या हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 में प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करके शादी अमान्य घोषित कर सकता है.”

 

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