Saturday, January 29, 2022

सुप्रीम कोर्ट ने दिए आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी की गिरफ्तारी के आदेश, निजी संपत्ति होगी जब्त

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सुप्रीम कोर्ट ने आज आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा और दो अन्य निदेशकों को तत्काल गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस को अनुमति दे दी है। कोर्ट ने शर्मा की निजी संपत्तियों को भी जब्त करने का आदेश दिया है, जिसमें दक्षिणी दिल्ली में मौजूद उनका बंगला भी शामिल है। इनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है।

अदालत ने कहा कि हमने उत्तर प्रदेश पुलिस की निगरानी में एक होटल में हिरासत में रखे गये किसी भी निदेशक को गिरफ्तार करने से किसी एजेंसी को कभी नहीं रोका। सर्वोच्च अदालत ने करीब 200 लोगों और कंपनियों को नोटिस जारी किया। इन लोगों पर अदालत द्वारा नियुक्त किए गए फोरेंसिक ऑडिटर्स के साथ सहयोग न करने के आरोप हैं।

ये फोरेंसिक ऑडिटर्स आम्रपाली के घर खरीदने वाले लोगों के पैसों की जानकारी को ट्रैक कर रहे हैं। ये कंपनियां और लोग आम्रपाली के साथ आर्थिक लेनदेन में शामिल रहे हैं। कोर्ट आम्रपाली समूह की विभिन्न परियोजनाओं में करीब 42,000 फ्लैट बुक कराने वाले खरीदारों को कब्जा दिलाने के लिये उनके द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

इस समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तथा दो निदेशक शीर्ष अदालत के निर्देश पर अभी तक उप्र पुलिस की हिरासत में थे। शीर्ष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज धोखाधड़ी के एक अलग मामले में दिल्ली पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ करने की इजाजत दे दी है।

आम्रपाली के निदेशकों ने ज़मानत की गुहार लगाई लेकिन कोर्ट ने दो टूक मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हमने आप लोगों को अपनी कस्टडी से पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। हमने सारी बात और माजरा समझकर यह कदम उठाया है।

गौरतलब है कि दिल्ली में रहने वाले अभिनव जैन ने दिसंबर 2016 में इन तीनों के खिलाफ आपराधिक साजिश कर 6.60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट आम्रपाली समूह में हुए फर्जीवाड़े का पता लगाने के लिए ऑडिटर्स की नियुक्ति कर चुका है, जिसमें कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आ चुकी हैं।

ऑडिटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आम्रपाली समूह ने करीब 500 लोगों से अधिक के नाम पर 1 रुपये, 5 रुपये और 11 रुपये वर्गफुट की दर से फ्लैट की बुकिंग की और ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारी, चपरासी और ड्राइवर्स के नाम पर 23 कंपनियां बनाई गईं और फिर इनमें घर खरीदने वाले खरीदारों के पैसे को डायवर्ट किया गया।

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