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केरल के बहुचर्चित हादिया केस मामले में देश की सर्व्वोच अदालत ने हादिया की मर्जी को अहम करार देते हुए उसके परिजनों को अगली सुनवाई पर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है.

माचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सोमवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में लड़की सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है.  चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई में बेंच हादिया की राय जानना चाहती है. इस दौरान हादिया से पूछा जाएगा कि वह अपने पिता के साथ रहना चाहती है या पति के साथ जाना चाहती है.

इसके अलावा कोर्ट ने जांच एजेंसी एनआईए को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि क्‍या अपराधी से प्‍यार करना गुनाह है? कोर्ट ने कहा, क्या कोई ऐसा कानून है कि किसी अपराधी से साथ बालिग लडकी प्यार नहीं कर सकती या शादी नहीं कर सकती? बेंच ने कहा कि अगर लड़की बालिग है तो सिर्फ उसकी सहमति ही जरूरी होती है. कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि शादी के मामले में लड़की की सहमति सबसे ऊपर है. अगर कोई किसी अपराधी से भी शादी करना चाहे तो उसे कोई कानून जबरदस्ती रोक नहीं सकता.

केरल हाई कोर्ट ने 25 मई को 24 साल की हिंदू महिला हादिया उर्फ़ अखिला की शादी को रद्द कर दिया था. साथ ही केरल हाईकोर्ट ने हादिया को माता-पिता के पास रखने का निर्देश दिया था. हादिया ने धर्मपरिवर्तन कर इस्लाम धर्म कबूल करके शाफीन जहां नामक युवक से निकाह किया था.

ध्यान रहे हादिया ने हाल ही में एक वीडियो में कहा था कि उसके पिता रोजाना उसे पीटते हैं और जल्द ही उसकी हत्या कर दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई 27 नवंबर तक टाल दी और हदिया के पिता से अगली सुनवाई में उसे कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा है.

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