सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर अहमद फारुखी को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा दे। फारुखी ने जान को खतरे की आशंका जताई है।

फारुकी ने अयोध्या मामले में एक मध्यस्थ श्रीराम पांचू के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच को सूचित किया कि उनकी जान को खतरा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को यूपी वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मामले में अहम पार्टी हैं ऐसे में वह उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देते हैं कि वह फारुखी को तत्काल समुचित सुरक्षा उपलब्ध कराएं। तभी उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडीशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्या भाटी और कमलेन्द्र मिश्र ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि आदेश का पालन होगा और फारुखी को समुचित सुरक्षा दी जाएगी।

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इस सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से मामले में पेश हो रहे राजीव धवन ने कोर्ट से कहा कि फारुखी को खतरा उत्तर प्रदेश सरकार से ही होगा। राजीव धवन ने कोर्ट में शिकायती लहजे में कहा कि ‘अदालत द्वारा सभी सवाल मुस्लिम पक्ष से ही किए गए हैं, जबकि हिंदू पक्ष से एक भी सवाल नहीं किया गया है।’
राजीव धवन ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं दिए गए हैं, जिनसे पता चले कि केन्द्रीय गुंबद के नीचे ही राम का जन्म हुआ। धवन ने कहा कि वहां नमाज पढ़े जाने से रोके जाने से मुस्लिमों का दावा कमजोर नहीं हो जाता।
मुस्लिम पक्ष का हमेशा से वहां दावा रहा है। अगर ऐसा न होता तो फिर हिंदू पक्ष को 1934 में एक गुंबद को गिराने या 1949 में जबरन मूर्ति रखे जाने की क्या जरूरत थी।धवन ने सुनवाई के दौरान औरंगजेब के बारे में भी बयान दिया।
उन्‍होंने कहा कि औरंगजेब सबसे उदार शासकों में से एक था। सीमित ज्ञान वाले हिंदू विवाद के भाग्य का निर्धारण नहीं कर सकते हैं। इस्लामिक कानून बहुत जटिल है।
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