सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोरोना की जांच को लेकर केंद्र सरकार को बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट लैब को कोरोना जांच के लिए पैसे लेने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा, निजी लैब द्वारा लिये जा रहे 4,500 रुपये को लेकर कहा है कि ये अपनी मनमानी से पैसे नहीं वसूल सकते। बता दें कि कोरोना की जांच को लेकर निजी लैब 4,500 रुपये तक ले रहे हैं।

जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा हम निजी लैब को कोविड-19 के परीक्षण के लिए पैसे वसूलने की अनुमति नहीं देते हैं। सरकार को इसकी जांच मुफ्त में करनी चाहिए। साथ ही कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया है कि निजी लैब कोरोना टेस्ट के पैसे मरीज की बजाय सरकार से ले सकें, ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि देश की 118 सरकारी लैबों में 15 हजार टेस्ट हो रहे थे, जो पर्याप्त नहीं था। इसलिए निजी लैब में जांच के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया। ऐसे में कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल जनरल तुषार मेहता को सुझाव देते हुए कहा कि निजी लैब को जांच के लिए ज्यादा शुल्क न दें। कोई ऐसा तंत्र विकसित करें जिसके तहत निजी लैब के टेस्ट राशि को सरकार वापस कर सके।

मेहता ने कहा कि अभी हालात लगातार बदल रहे हैं और इन परिस्थितियों में हमें कितनी प्रयोशालाओं की जरूरत होगी और यह लॉकडाउन कितना लंबा चलेगा। इस पर बेंच ने कहा, केंद्र को यह निश्चित करना चाहिए कि निजी लैब जांच के लिए ज्यादा पैसे ना लें और साथ ही ऐसा मैकेनिज्म भी बनाएं, जिसके जरिए जांच के लिए ली गई फीस की वापसी की व्यवस्था हो।

कोरोनावायरस के लिए बनी नेशनल टास्क फोर्स की अनुशंसा पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने टेस्ट के संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि कोरोना संक्रमण की जांच की फीस 4 हजार 500 रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान लोगों के सामने आर्थिक संकट है, लिहाजा लोग कोरोना वायरस की इतनी महंगी जांच से बचेंगे जिसके चलते बीमारी फैल सकती है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया था कि इसकी जांच मुफ्त में करवानी चाहिए।

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