केंद्र सरकार की मोदी सराकर ने 12000 करोड़ रुपए से अधिक रकम के पंजाब नैशनल बैंक घोटाले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से कराए जाने की मांग का विरोध किया है. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च तय की है.

सुप्रीम कोर्ट में इस सिलसिले में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की और से कहा गया कि इस मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है और जांच जारी है. ध्यान रहे इस याचिका में पुरे मामले की जाँच और आरोपी हीरा व्यापारी नीरव मोदी को विदेश से वापस लाने के लिये SIT के गठन का मांग की गई.

यह याचिका वकील विनीत ढांडा ने दायर कर पंजाब नैशनल बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में उन्होंने कोर्ट से मांग की कि कोर्ट नीरव मोदी और घोटाले में शामिल अन्य लोगों को दो महीने के अंदर भारत लाने के लिए कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दे और मामले की जांच SIT से कराने का आदेश दे.

याचिका में यह भी कहा गया है कि दस करोड़ रुपए या इससे अधिक राशि के कर्ज की मंजूरी और उसके वितरण की स्थिति में इस रकम की सुरक्षा और वसूली सुनिश्चित करने के लिए वित्त मंत्रालय को दिशानिर्देश तैयार करने चाहिए. इसके अलावा दस्तावेजों में खामियों के आधार पर भी कर्ज की मंजूरी देने वाले बैंक कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने और कर्ज की वसूली के लिये ऐसे अधिकारियों की सपंत्ति जब्त करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है, भले ही वे रिटायर हो गए हों.

मोदी सरकार की और से अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो चुकी. इसके अलावा भी कई ऐसे बिंदु हैं जिनके आधार पर वह इस जनहित याचिका का विरोध कर रहे हैं. बता दें कि सीबीआई ने इस घोटाले के मामले में नीरव मोदी, उसके रिश्तेदार गीतांजलि जेम्स के मेहुल चौकसी और अन्य के खिलाफ 31 जनवरी को पहली FIR दर्ज की थी और अभी कुछ दिन पहले उसने एक और FIR दर्ज की है.

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