देश में शरणार्थियों के तौर पर रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों को निकाले जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. इस दौरान देश के दिग्गज वकील इस मुद्दे की पैरवी करने पहुंचे.

इस दौरान अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा तो वहीं फली एस नरीमन, प्रशांत भूषण, कोलिन गोनसाल्विस, सलमान खुर्शीद जैसे दिग्गज वकीलों ने रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की पैरवी की. इसके अलावा जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी पश्चिम बंगाल सरकार की और से पेश हुए तो वहीँ वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से पक्ष रखा.

सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच के समक्ष चल रही सुनवाई के दौरान मुद्दें के संदर्भ में होने वाली निजी बहस से बेंच को यह कहने के लिए मजबूर कर दिया कि हम नहीं चाहते कि वकीलों की ओर से निजी टिप्पणियां की जाएं। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे.

बेंच ने कहा कि ‘इस मामले में सभी पक्ष इमोशनल पहलू पर बहस से बचें, सिर्फ कानूनी पहलू पर ही ध्यान दिया जाएगा. ये केस मानवता से जुड़ा है और सुनवाई में आपसी सम्मान की जरूरत है. हम इस केस के सभी पक्षों पर विचार करेंगे. हमारी ओर से सरकार के फैसले को सही भी किया जा सकता है और अन्य विकल्प भी दिए जा सकते हैं.

इस दौरान बेंच ने ये भी स्वीकार किया कि पहली बार उसके सामने इस तरह का मामला आया है. इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है.

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