नई दिल्ली | देश में किसानो द्वारा आत्महत्या करने के मामलो में अप्रत्याशित तौर पर काफी वृद्धि हुई है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा की वह यह सुनिश्चित करे की कोई भी किसान खुदखुशी न करे. देश की सर्वोच्च अदालत ने सरकार को किसानो के लिए ऐसी योजनाये बनाने के लिए कहा है जिससे किसान खुदखुशी करने के लिए बाध्य न हो.

देश में किसानो की बढती आत्महत्या को देखते हुए एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल इस पर संज्ञान लेने की मांग की थी. चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा की सरकार किसानो को आत्महत्या से रोकने में नाकाम रही है. हमें लगता है की सरकार इस मामले में गलत दिशा में जा रही है. जमीनी स्तर पर किसानो की हालत बहुत ख़राब है और उन्हें काफी परेशानी से झूझना पड़ रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने किसानो की हालत का जिक्र करते हुए कहा की अभी तक किसान बैंक से कर्ज लेता है और न चुकाने की स्थिति में वो आत्महत्या कर लेता है. सरकार किसान को मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करती है. लेकिन इसका हल मुआवजा नही है. आप ऐसी योजनाये बनाए जिससे किसान आत्महत्या करने के बारे में न सोचे.अगर बम्पर फसल होती है तो किसान को फसल के उचित दाम नही मिलते.

सुप्रीम कोर्ट की फटकार पर बोलते हुए अटोर्नी जनरल ने कहा की सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है. हमने किसानो के लिए कई योजनाये बनायी है. अटोर्नी जनरल ने सभी किसानो की खुदखुशी को कर्ज वापसी नही मानते हुए कहा की कुछ किसान दुखद कारणों से भी खुदखुशी करते है. उधर एनजीओ के वकील ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा की कई समितियों की सिफ़ारिशो के बावजूद सरकार किसानो की अनदेखी कर रही है.


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