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नई दिल्ली | नोट बंदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर मोदी सरकार को फटकार लगाई है. नोट बंदी के बाद देशभर में हो रही कैश की किल्लत को मद्देनजर रखते हुए कोर्ट ने सरकार से पुछा की कैसे कुछ लोगो के पास करोडो रूपए पहुँच गया जानकी आम लोगो को दो हजार रूपए नही नसीब नही हो रहे है. कोर्ट के सवाल पर सरकार ने इसके लिए बैंक कर्मियों को दोषी ठहराया.

नोट बंदी की वजह से लोगो को हो रही परेशानी और कैश की किल्लत पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार से पुछा की कुछ लोगो के पास करोडो की नयी करेंसी कैसे मिल रही है. इस सवाल के जवाब में अटोर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा की बैंक कर्मियों की मिली भगत की वजह से ऐसा हो रहा है. केंद्र सरकार ऐसे कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही कर रही है.

मुकुल रोहतगी ने आगे कहा की कुछ बैंक मेनेजर ऐसे लोगो के साथ मिले हुए है. कुछ के खिलाफ कार्यवाही की गयी है जबकि बाकी के खिलाफ हम कार्यवाही कर रहे है. सुप्रीम कोर्ट ने करेंसी की सप्लाई पर सवाल उठाते हुए कहा की नोट बंदी के बाद लोगो के पास कैश क्यों नही पहुँच रहा है? करेंसी की सप्लाई क्यों नही हो रही है? इस सवाल के जवाब में मुकुल रोहतगी ने पूरा आंकड़ा अदालत के सामने रखा.

मुकुल रोहतगी ने बताया की नोट बंदी के समय 17.5 लाख करोड़ की करेंसी चलन में थी. इसमें से 15 करोड़ की करेंसी बैन कर दी गयी. लेकिन तब भी ढाई लाख करोड़ करेंसी चलन में रही. फ़िलहाल 5 लाख करोड़ की नयी करेंसी लोगो में बांटी जा चुकी है. हालात धीरे धीरे सुधर रहे है. नोट बंदी के बावजूद हालात बिगड़े नही. इसका सबूत यह है की कोई दूधवाला भी नोट बंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट नही आया.


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