नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक एतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया. उनके इस आदेश के बाद किसी भी नागरिक की निजी जानकारियों को सार्वजानिक नही किया जा सकेगा. यही नही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद व्हाट्सएप की नयी निजता निति पर भी असर पड़ेगा. हालाँकि संविधान ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार नही माना है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है.

दरअसल सरकार के हर सरकारी योजनाओं में आधार कार्ड को जरुरी करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी थी. इस मामले में कई जनहित याचिकाए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी. मुख्य याचिकाकर्ताओ में कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के. एस. पुट्टास्वामी, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहली अध्यक्ष एवं मैग्सेसे अवार्ड विजेता शांता सिन्हा और नारीवादी शोधकर्ता कल्याणी सेन मेनन जैसे नाम शामिल हैं.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने याचिका पर फैसला सुनाते हुई कहा की निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है. हाँ निजता की एक सीमा तय की जा सकती है. हालाँकि केंद्र सरकार इसके विरोध में नजर आई. सरकार का कहना था की 1954 में आठ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले और 1962 में छह न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं माना है.

इस पूरी सुनवाई के दौरान बीजेपी शासित राज्य गुजरात और महाराष्ट्र ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार नही माना जबकि कांग्रेस शासित प्रदेश कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पुदुचेरी और तृणमूल कांग्रेस इस बात के पक्ष में नजर आये. यह फैसला 9 जजों की पीठ ने सुनाया जिसमे प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. एस. खेहर, न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति आर. के. अग्रवाल, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल है.

19 जुलाई से 2 अगस्त के बीच मामले की सुनवाई पूरी हुई और पीठ ने 2 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रखा. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 सितंबर, 2016 को दिए अपने आदेश में व्हाट्सएप को नई निजता नीति लागू करने की इजाजत दी थी, हालाँकि कोर्ट ने व्हाट्सएप को 25 सितम्बर तक इकठ्ठा किये गए डाटा को फेसबुक या अन्य किसी कंपनी के साथ शेयर करने पर रोक लगा दी थी. बाद में हाई कोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी.

Loading...