कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सी एस कर्णन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किया है. ये वारंट अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गैरहाजिर रहने के कारण किया गया हैं. न्यायालय ने जमानती वारंट जारी करते हुए कहा कि गिरफ्तार अधिकारी के समक्ष दस हजार रूपये का निजी मुचलका जमा करने का आदेश दिया.

इस बारें में चीफ जस्टिस जी एस खेहर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा, ‘इस मामले में न्यायमूर्ति सी एस कर्णन की मौजूदगी सुनिश्चित करने का कोई और विकल्प नहीं है.’ पीठ ने गिरफ्तार अधिकारी के समक्ष दस हजार रूपये का निजी मुचलका जमा करने का आदेश भी दिया.

जस्टिस सीएस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वारंट बिना जांच, सबूत और चर्चा के जारी किया गया है. यह आदेश मनमाना, मेरी जिंदगी और कॅरियर बर्बाद करने के लिए जानबूझकर यह आदेश जारी किया गया है. उन्‍होंने कहा कि यह जातिगत मुद्दा है. एक दलित जज को सार्वजनिक रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है. यह अत्‍याचार है.

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याद रहे जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट तथा हाइकोर्ट के पूर्व व मौजूदा 20 जजों को भ्रष्ट बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फरवरी में पत्र लिखा था. सर्वोच्च अदालत ने जस्टिस कर्णन के इसी पत्र पर संज्ञान लिया है. कर्णन ने 23 जनवरी को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. कर्णन ने पीएम को लिखे पत्र में 20 जजों के नाम भी लिखे थे और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को कर्णन के खिलाफ नोटिस जारी किया करते हुए पूछा था कि उनके इस पत्र को कोर्ट की अवमानना क्यों न माना जाए. इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना की कारवाई शुरू की थी.

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