नई दिल्ली | केरल में एक हिन्दू लड़की के धर्मांतरण और फिर शादी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NIA से जांच कराने का आदेश दिया है. इसके अलावा कोर्ट ने किसी भी फैसले पर पहुँचने से पहले लड़की को कोर्ट में पेश करने पर भी बल दिया. उन्होंने कहा की कोई भी फैसला करने से पहले लड़की का कोर्ट में पेश होना जरुरी है. फ़िलहाल लड़की अपने परिजनों के पास है , लेकिन याचिकाकर्ता को लड़की की हत्या होने का शक है.

बुधवार को केरल के ‘लव जिहाद’ के एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने NIA से जांच कराने का आदेश दिया. इसके अलावा कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिृवत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.वी. रविंद्रन को जांच की निगरानी करने के लिए नियुक्त किया. चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस डीवाय चंद्रचूड की पीठ ने अपने आदेश में कहा की कोर्ट एनआईए, केरल सरकार और अन्य सभी से मामले का विवरण लेने के बाद कोई फैसला सुनाएगी. इसके अलावा कोर्ट ने फैसला सुनाने से पहले लड़की को कोर्ट में पेश करने का भी आदेश दिया.

कोर्ट ने यह आदेश याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल के आग्रह पर दिया. कपिल ने कोर्ट से कहा था की कोर्ट को लड़की से बात करने के बाद ही किसी फैसले पर पहुंचना चाहिए. हालाँकि लड़की के परिजनों की और से दलील दे रहे वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह का कहना था की यह अंतर धार्मिक मामला है इसलिए कोर्ट को बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. बताते चले की पिछले साल दिसम्बर में शफीन की शादी एक हिन्दू लड़की से हुई थी.

शफीन का कहना है की शादी से पहले ही लड़की ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था. जबकि लड़की के परिजनों का आरोप है की शफीन ने बहला फुसलाकर पहले उनकी लड़की से शादी की और फिर उसका धर्म परिवर्तन करा दिया. लड़की के परिजनों ने शफीन पर कई अपराधो में शामिल होने का भी आरोप लगाया. बाद में केरल हाई कोर्ट ने इस शादी को रद्द कर , लड़की को उसके परिजनों के हवाले कर दिया था.

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