साबरमती एक्सप्रेस विस्फोट मामलें में सुप्रीम कोर्ट ने गुलजार अहमद वानी को इस वर्ष एक नवम्बर से जमानत पर रिहा कर देने का आज आदेश दिया हैं. वानी पर इस पुरे विस्फोट मामलें की साजिश रचने का आरोप हैं.

2001 से जेल में बंद अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व शोध छात्र वानी की गिरफ्तारी 28 साल किउम्र में हुई थी और अब उसकी उम्र 44 साल हो चुकी है. यह विस्फोट स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ था जब वह मुजफ्फरपुर से अहमदाबाद जा रही थी और कानपुर के नजदीक थी. इस विस्फोट में दस व्यक्तियों की जान चली गयी थी.

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड की पीठ ने कहा कि वानी 16 साल से अधिक समय से जेल में है और 11 में से 10 मामलों में उसे बरी किया जा चुका है. अभी तक अभियोजन के 96 गवाहों में से सिर्फ 20 से ही जिरह हो सकी है.

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न्यायालय ने निचली अदालत को सभी आवश्यक गवाहों से 31 अक्टूबर तक जिरह पूरी कर लेने और हर हाल में वानी को एक नवम्बर से निचली अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया

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